खेत बचाने के लिए बिछा ‘मौत का तार’! करंट की चपेट में हाथी शावक की मौत, रातभर चिंघाड़ता रहा 27 हाथियों का झुंड

अंबिकापुर, 1 अक्टूबर 2026। सरगुजा के उदयपुर वन परिक्षेत्र में करंट ने एक हाथी शावक की जान ले ली। अलकापुरी जंगल में खेतों के आसपास लगाए गए झटका तार की चपेट में आने से शावक की मौत हो गई। हादसे के बाद उसका 27 हाथियों का झुंड रातभर घटनास्थल के आसपास मंडराता और चिंघाड़ता रहा, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बना रहा।
घटना बुधवार रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है। अलकापुरी क्षेत्र में हाथियों का दल पिछले कई दिनों से विचरण कर रहा था। हाथियों से फसल बचाने के लिए खेतों के आसपास एक किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में झटका तार लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसी दौरान झुंड के साथ चल रहा हाथी शावक तार में उलझ गया। उसकी सूंड और पैर में तार फंसने के बाद करंट की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
शावक की मौत के बाद रातभर चिंघाड़ता रहा झुंड
शावक की मौत के बाद 27 हाथियों का दल घटनास्थल के आसपास ही डटा रहा। ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों की चिंघाड़ रातभर सुनाई देती रही। झुंड की मौजूदगी के कारण आसपास के लोग सहमे रहे और घटनास्थल के नजदीक जाने से बचते रहे।
सीधे बिजली कनेक्शन की भी जांच
वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि खेतों के आसपास लगाए गए तार में किस तरह का करंट प्रवाहित हो रहा था और तार किसने लगाया था। स्थानीय स्तर पर झटका तार में अवैध तरीके से घरेलू बिजली की हुकिंग किए जाने की आशंका भी जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
वन विभाग की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद मौत की परिस्थितियां और अधिक स्पष्ट होंगी।
जमीन और तार लगाने की भी जांच
रिपोर्टों के अनुसार, जिस खेत के आसपास झटका तार लगाए जाने की बात सामने आई है, वह झिरमिटी सरपंच चंदन एक्का और उनके परिवार से जुड़ी भूमि बताई जा रही है। वन विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि तार किसने लगाया और उसमें बिजली की आपूर्ति किस तरीके से की गई। जिम्मेदारी तय होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई है।
लगातार हो रही घटनाओं से वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल
सरगुजा की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ दिन पहले 26 सितंबर को जशपुर के दुलदुला क्षेत्र में भी करंट की चपेट में आने से हाथी की मौत हुई थी। उस मामले में बिजली प्रवाहित तार बिछाए जाने को लेकर कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी।
अलकापुरी की घटना ने एक बार फिर जंगल से लगे इलाकों में फसल सुरक्षा के नाम पर लगाए जा रहे बिजली वाले तारों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल वन विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हाथी शावक की मौत के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां क्या थीं और तार में करंट कैसे पहुंचा।
